Sunday, June 22, 2008

भारतीय हाइकु



भारतीय हाइकु

Wednesday, February 20, 2008

areena


Sunday, January 13, 2008

बच्चों के लिए दो किताबें

(1)
"विश्वभर से बच्चों के हाइकु"

विश्वभर के बच्चों के द्वारा लिखी गई अनेक भाषाओ की हाइकु कविताओं के हिन्दी अनुवाद सहित पहली बार प्रकाशित पुस्तक-



विश्व भर से बच्चों के हाइकु
हाइकु प्रवेशिका (डा० अंजली देवधर)







० "हाइकु" दुनिया की सबसे छोटी कविता है जो मात्र १७ अक्षरों में लिखी जाती है। इसमें तीन पंक्तियाँ होती हैं पहली पंक्ति में ५ अक्षर दूसरी में ७ अक्षर तथा तीसरी पंक्ति में ५ अक्षर होते हैं।
० हाइकु मूलत जापानी काव्य विधा है। अंग्रेजी में १७ अक्षर के नियम का पालन नहीं किया जाता है परन्तु हिन्दी में यह संभव है।
०हाइकु में प्रकृति के किसी विशेष क्षण को अनुभूति को अभिव्यक्त किया जाता है। इस तरह हाइकु कविता व्यक्ति को प्रकृति, समाज, परिवेश एवं प्राणिमात्र के साथ सामंजस्य बनाना सिखाती है।
० बच्चों में चूँकि प्रकृति के प्रति लगाव स्वाभाविक रूप से होता है इसलिए बच्चों को हाइकु लिखना यदि सिखा दिया जाए तो उनके मानसिक विकास एवं व्यापक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में ये बहुत उपयोगी है।
० इस पुस्तक में दुनिया भर से ३० देशों के बच्चों के द्वारा लिखे गए हाइकु हैं, जिन्हें अंग्रेजी तथा हिन्दी में प्रकाशित किया गया है।
० बच्चों के अन्दर छिपी अदूभुत रचनात्मक प्रतिभा को विकसित करने की दिशा में यह पुस्तक अति महत्वपूर्ण है, इस पुस्तक में प्रकाशित हाइकु कविताओं की चर्चा पूरे विश्व समुदाय में हो रही है। बच्चों के लिए पूरी दुनिया के बाल मनोवैज्ञानिक व शिक्षाविद् इसे बहुत उपयोगी बता रहे हैं।
० पुस्तक में कुल ३०६ हाइकु हैं जो विश्व स्तर पर बच्चों कि लिए हाइकु प्रतियोगिताओं में चुने गए हैं, इन्हें ३० देशों के बच्चों ने लिखा है।
० पुस्तक का प्रकाशन विश्व स्तर की पुस्तकों के अनुरूप है। इस पुस्तक में २४२ पृष्ठ हैं तथा इसका मूल्य रु० 300 है।
० इस पुस्तक को यदि विद्यालयों के पुस्तकालयों में रखने की व्यवस्था हो जहाँ इसे शिक्षक तथा बच्चे पढ़ सकें तो यह पुस्तक बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में क्रांति ला सकती है।

विश्वभर से बच्चों के हाइकु -हाइकु प्रवेशिका
डा० अंजलि देवधर
JAL Foundation
JAL Bldg; 2-4-11, Higashi-Shinagawa
Shinagawa-Ku and Tokyo 140-0002, JAPAN

(2)


नन्हा बलिदानी



यह पुस्तक बच्चों के लिए विशेष रूप से लिखी गई हैं। भाषा बच्चों के अनरूप है। देश प्रेम, मित्रता, साहस की प्रेरणा देने वाली यह पुस्तक बच्चों के लिए अत्यन्त उपयोगी है। मानव संसाधन मंत्रालय भारत सरकार का केन्द्रीय विद्यालय संगठन इस पुस्तक को अपने केन्द्रीय विद्यालयों के पुस्तकालयों हेतु विशेष रूप से स्वीकृत कर चुका है। देशभर के बाल साहित्यकारों ने इस पुस्तक की भूरि भूरि प्रशंसा की है तथा इसे बच्चों के पाठ्यक्रम में लगाये जाने के लिए बहुत उपयोगी बताया है।
० इस पुस्तक का कई भाषाओं में अनुवाद हुआ है तथा कई विद्यालय इसे नियमित रूप से वच्चों को पढ़वा रहे हैं।
० पुस्तक में ३२ पृष्ठ है तथा मूल्य मात्र ३० स्र्पए है।

नन्हा बलिदानी
लेखक- डा० जगदीश व्योम
मूल्य- ३० रुपए
प्रकाशक- सारंग प्रकाशन, मथुरा