Monday, November 23, 2009

नर्मदा की लहरों-सी अठखेलियाँ करती अभिज्ञा की कविताएँ



चिट्ठाजगत




नर्मदांचल के वरिष्ठ कवि हरगोविन्द शर्मा के काव्य-संग्रह "अभिज्ञा" में १०१ कविताएँ हैं। इन कविताओं में कवि ने अपने लम्बे जीवनानुभवों को विविध बिम्बों और प्रतीकों के माध्यम से प्रस्तुत किया है। कवि की चिंता कहीं सांस्क॓तिक अवमूल्यन को लेकर उभरी है तो कहीं लोक जीवन की विसंगतियाँ उसे उद्वेलित करती हैं। कुल मिलाकर कवि एक अच्छे समाज और सकारात्मक सोच का पक्षधर है। प्रकृति चित्रण में कवि का मन खूब रमा है। शृंगारपरक कविताओं के सृजन में कवि सिद्धहस्त है। छन्द, लय और प्रवाह ऐसा कि कविता नर्मदा की लहरों-सी अठखेलियाँ करती हुई एक विशिष्ट भाव-भंगिमा के साथ प्रवाहित होती हुई सी प्रतीत होती है। कवि ने अनेक प्रकार के छन्दों के सफल प्रयोग "अभिज्ञा" की कविताओं में किए हैं। कविताओं की प्रवाहात्मकता देखते ही बनती है-
पांखुरी खिली नहीं
रूप घट भरा नहीं
मकरन्दी मलयज की
वासन्ती गन्ध नहीं।

तंद्रिलता नयन बीच
अर्चन - उपासना
दिवा सपन आँखों में
जीवन की साधना।

इसी प्रकार "वतन" कविता में कवि ने सधे हुए छंद में लय एवं प्रवाह के साथ-साथ शब्द-मैत्री पर विशेष ध्यान दिया है-

नयन याचक दरश सुख सपन के लिये
रूप आसक्ति मानस तपन के लिये
चिर मनःस्ताप केवल पतन के लिये
श्वास प्रश्वास है जग मनन के लिये।।
संग्रह की "पछुआई पवन" कविता पढ़ते ही एक भावचित्र सहज ही उभरने लगता है-

पवन चले पछुआई पूरब के पौर पौर
महलों से कुटिया तक काँप रहा छोर-छोर।।
निर्वसना अंगों की झाईं है गुलाब सी
रुपहले अधरों की गंध है पराग सी
जन मन को मोह रही नाच रही ठौर ठौर
पवन चले पछुआई पूरब के पौर पौर ।।

कुल मिलाकर अभिज्ञा की कविताएँ कवि के जीवनानुभवों की रचनात्मक अभिसंचित पूँजी है जिनमें सदियों से अविछिन्न चली आ रही पारंपरिक काव्यशैली की अनूठी गंध है। इन कविताओं को पढ़कर एक विशेष प्रकार की अनुभूति होती है। मध्य-प्रदेश लेखक संघ प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह काव्य-संग्रह पठनीय एवं प्रशंसनीय है।

--
अभिज्ञा (काव्य-संग्रह)
कवि- हरगोबिन्द शर्मा
प्रकाशक- मध्यप्रदेश लेखक संघ, भोपाल
संस्करण- जून-२००८

Sunday, June 22, 2008

भारतीय हाइकु



भारतीय हाइकु

Wednesday, February 20, 2008

areena

Sunday, January 13, 2008

बच्चों के लिए दो किताबें

(1)
"विश्वभर से बच्चों के हाइकु"

विश्वभर के बच्चों के द्वारा लिखी गई अनेक भाषाओ की हाइकु कविताओं के हिन्दी अनुवाद सहित पहली बार प्रकाशित पुस्तक-



विश्व भर से बच्चों के हाइकु
हाइकु प्रवेशिका (डा० अंजली देवधर)







० "हाइकु" दुनिया की सबसे छोटी कविता है जो मात्र १७ अक्षरों में लिखी जाती है। इसमें तीन पंक्तियाँ होती हैं पहली पंक्ति में ५ अक्षर दूसरी में ७ अक्षर तथा तीसरी पंक्ति में ५ अक्षर होते हैं।
० हाइकु मूलत जापानी काव्य विधा है। अंग्रेजी में १७ अक्षर के नियम का पालन नहीं किया जाता है परन्तु हिन्दी में यह संभव है।
०हाइकु में प्रकृति के किसी विशेष क्षण को अनुभूति को अभिव्यक्त किया जाता है। इस तरह हाइकु कविता व्यक्ति को प्रकृति, समाज, परिवेश एवं प्राणिमात्र के साथ सामंजस्य बनाना सिखाती है।
० बच्चों में चूँकि प्रकृति के प्रति लगाव स्वाभाविक रूप से होता है इसलिए बच्चों को हाइकु लिखना यदि सिखा दिया जाए तो उनके मानसिक विकास एवं व्यापक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में ये बहुत उपयोगी है।
० इस पुस्तक में दुनिया भर से ३० देशों के बच्चों के द्वारा लिखे गए हाइकु हैं, जिन्हें अंग्रेजी तथा हिन्दी में प्रकाशित किया गया है।
० बच्चों के अन्दर छिपी अदूभुत रचनात्मक प्रतिभा को विकसित करने की दिशा में यह पुस्तक अति महत्वपूर्ण है, इस पुस्तक में प्रकाशित हाइकु कविताओं की चर्चा पूरे विश्व समुदाय में हो रही है। बच्चों के लिए पूरी दुनिया के बाल मनोवैज्ञानिक व शिक्षाविद् इसे बहुत उपयोगी बता रहे हैं।
० पुस्तक में कुल ३०६ हाइकु हैं जो विश्व स्तर पर बच्चों कि लिए हाइकु प्रतियोगिताओं में चुने गए हैं, इन्हें ३० देशों के बच्चों ने लिखा है।
० पुस्तक का प्रकाशन विश्व स्तर की पुस्तकों के अनुरूप है। इस पुस्तक में २४२ पृष्ठ हैं तथा इसका मूल्य रु० 300 है।
० इस पुस्तक को यदि विद्यालयों के पुस्तकालयों में रखने की व्यवस्था हो जहाँ इसे शिक्षक तथा बच्चे पढ़ सकें तो यह पुस्तक बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में क्रांति ला सकती है।

विश्वभर से बच्चों के हाइकु -हाइकु प्रवेशिका
डा० अंजलि देवधर
JAL Foundation
JAL Bldg; 2-4-11, Higashi-Shinagawa
Shinagawa-Ku and Tokyo 140-0002, JAPAN

(2)


नन्हा बलिदानी



यह पुस्तक बच्चों के लिए विशेष रूप से लिखी गई हैं। भाषा बच्चों के अनरूप है। देश प्रेम, मित्रता, साहस की प्रेरणा देने वाली यह पुस्तक बच्चों के लिए अत्यन्त उपयोगी है। मानव संसाधन मंत्रालय भारत सरकार का केन्द्रीय विद्यालय संगठन इस पुस्तक को अपने केन्द्रीय विद्यालयों के पुस्तकालयों हेतु विशेष रूप से स्वीकृत कर चुका है। देशभर के बाल साहित्यकारों ने इस पुस्तक की भूरि भूरि प्रशंसा की है तथा इसे बच्चों के पाठ्यक्रम में लगाये जाने के लिए बहुत उपयोगी बताया है।
० इस पुस्तक का कई भाषाओं में अनुवाद हुआ है तथा कई विद्यालय इसे नियमित रूप से वच्चों को पढ़वा रहे हैं।
० पुस्तक में ३२ पृष्ठ है तथा मूल्य मात्र ३० स्र्पए है।

नन्हा बलिदानी
लेखक- डा० जगदीश व्योम
मूल्य- ३० रुपए
प्रकाशक- सारंग प्रकाशन, मथुरा